Petrol vs Electric Cars: अगर आप रोजाना 50 से 100 किलोमीटर तक कार चलाते हैं, तो कार खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत और माइलेज देखना काफी नहीं है. रोज की रनिंग ज्यादा होने पर फ्यूल और maintenance का खर्च भी आपके कुल बजट पर बड़ा असर डालता है. यही वजह है कि आजकल पेट्रोल कार के साथ electric car को भी लोग एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं.
ऐसे में petrol vs electric cars का सवाल उन लोगों के लिए खास हो जाता है, जिन्हें हर दिन ऑफिस, बिजनेस या दूसरे कामों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. पेट्रोल कार में फ्यूल भराना आसान है, जबकि electric car में घर पर चार्ज करके कम खर्च में रोज का सफर पूरा किया जा सकता है.
लेकिन दोनों में से किस कार का इस्तेमाल आपके लिए ज्यादा सही रहेगा? इसका जवाब केवल खरीद कीमत से नहीं, बल्कि रोज की रनिंग, चार्जिंग की सुविधा, फ्यूल खर्च और कार को कितने साल चलाना है, इन सभी बातों पर निर्भर करता है.
रोज 50-100 KM चलाने पर पेट्रोल कार का खर्च कितना आएगा?
मान लीजिए आपकी पेट्रोल कार औसतन 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है. अगर पेट्रोल की कीमत करीब 100 रुपये प्रति लीटर है, तो एक किलोमीटर चलाने पर लगभग 6.67 रुपये का फ्यूल खर्च आएगा.
अगर आप रोज 75 किलोमीटर कार चलाते हैं, तो एक दिन में करीब 500 रुपये का पेट्रोल खर्च हो सकता है. 30 दिनों में यह रकम करीब 15,000 रुपये तक पहुंच सकती है.
वास्तविक खर्च कार के milagemileage, ट्रैफिक, ड्राइविंग स्टाइल और पेट्रोल की स्थानीय कीमत के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है.
Petrol vs Electric Cars इलेक्ट्रिक कार में कितना खर्च आएगा?
इलेक्ट्रिक कार की रनिंग कॉस्ट आमतौर पर पेट्रोल कार की तुलना में कम हो सकती है,
मान लीजिए किसी electric car को चलाने में औसतन 1 से 1.5 रुपये प्रति किलोमीटर की बिजली लागत आती है. अगर आप रोज 75 किलोमीटर चलते हैं, तो दैनिक चार्जिंग खर्च लगभग 75 से 113 रुपये के बीच हो सकता है.
30 दिनों में यह खर्च करीब 2,250 से 3,400 रुपये के आसपास हो सकता है. वास्तविक रकम कार की बैटरी क्षमता, चार्जिंग लॉस, बिजली की दर और ड्राइविंग कंडीशन पर निर्भर करेगी.
यहीं पर petrol vs electric cars में बड़ा अंतर देखने को मिलता है. रोजाना ज्यादा किलोमीटर चलाने वाले व्यक्ति के लिए कम रनिंग कॉस्ट लंबे समय में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है.
मेंटेनेंस के मामले में क्या अंतर है?
petrol vs electric cars की तुलना में मेंटेनेंस भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
पेट्रोल कार में इंजन, इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर, एयर फिल्टर, स्पार्क प्लग और कई दूसरे mechanical port होते हैं. समय-समय पर सर्विस के दौरान इनकी जांच और जरूरत के अनुसार रिप्लेसमेंट करना पड़ता है.
इलेक्ट्रिक कार में पारंपरिक इंजन और उससे जुड़े कई पार्ट्स नहीं होते. इसमें इंजन ऑयल बदलने जैसी जरूरत नहीं होती. इलेक्ट्रिक मोटर का मैकेनिकल सेटअप भी अपेक्षाकृत सरल होता है.
इसका मतलब यह नहीं है कि EV में कोई maintains खर्च नहीं होता. टायर, ब्रेक, सस्पेंशन, एयर कंडीशनिंग, 12V बैटरी और दूसरे सिस्टम की सर्विस जरूरी रहती है. बैटरी की स्थिति और वारंटी की जानकारी भी खरीदने से पहले देखना जरूरी है.
चार्जिंग की सुविधा सबसे जरूरी है
रोज 50 से 100 किलोमीटर चलाने वाले व्यक्ति के लिए रात में कार को चार्ज करना काफी सुविधाजनक हो सकता है. सुबह कार तैयार मिल सकती है और रोजाना के सफर के लिए अलग से पेट्रोल पंप जाने की जरूरत कम हो सकती है.
लेकिन अगर आपके पास घर पर चार्जिंग की सुविधा नहीं है, तो मामला अलग हो जाता है. ऐसी स्थिति में आपको सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ सकता है.
इसलिए petrol vs electric cars में फैसला करने से पहले अपनी चार्जिंग व्यवस्था को जरूर ध्यान में रखें.
लंबी दूरी की यात्रा करने वालों के लिए क्या बेहतर है?
अगर आपकी रोजाना की रनिंग 50-100 किलोमीटर है, लेकिन महीने में कई बार लंबी दूरी की यात्रा भी करनी पड़ती है, तो कार चुनते समय उसकी वास्तविक रेंज और आपके रास्ते पर उपलब्ध charging station को देखना जरूरी है.
पेट्रोल कार को कुछ मिनटों में फ्यूल कराया जा सकता है और पेट्रोल पंप का नेटवर्क काफी बड़ा है. इलेक्ट्रिक कार में चार्जिंग के लिए ज्यादा समय लग सकता है.
रोज के शहर के सफर के लिए कई EV मालिक रात में घर पर चार्ज करके अगले दिन की जरूरत पूरी कर सकते हैं. इसलिए आपकी ड्राइविंग का पैटर्न यहां सबसे महत्वपूर्ण है.
पेट्रोल कार और इलेक्ट्रिक कार में किसे चुनें?
petrol vs electric cars में कोई एक जवाब सभी लोगों के लिए सही नहीं हो सकता.
अगर आपकी रोजाना रनिंग 50 से 100 किलोमीटर है, घर पर चार्जिंग की सुविधा है और आप कार को कई साल तक इस्तेमाल करने वाले हैं, तो इलेक्ट्रिक कार की कम running cost आपके लिए महत्वपूर्ण फायदा हो सकती है.
दूसरी तरफ अगर घर पर charging की सुविधा नहीं है, आपकी लंबी दूरी की यात्राएं ज्यादा हैं या आप ऐसी जगह रहते हैं जहां चार्जिंग नेटवर्क सीमित है, तो पेट्रोल कार आपके इस्तेमाल के हिसाब से ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है.
कार खरीदने से पहले सिर्फ शुरुआती कीमत न देखें. अपनी रोजाना दूरी, मासिक खर्च, चार्जिंग सुविधा, सर्विस कॉस्ट, बीमा, लोन और लंबी अवधि में कार को रखने की योजना को एक साथ देखकर फैसला करें.
Asif Ali एक Automobile और Content Creator हैं, जिन्हें ब्लॉगिंग का 2+ वर्षों का अनुभव है। वह Autos Prachar के संस्थापक हैं और कार, बाइक, व ऑटो न्यूज़ पर तथ्यात्मक, सरल और भरोसेमंद कंटेंट लिखते हैं।
