
यूरोप में कार सेफ्टी रेटिंग का नाम लेते ही सबसे पहले Euro NCAP का नाम दिमाग में आता है। यह वही संस्था है जो कारों की सेफ्टी टेस्टिंग करती है और उन्हें 5-स्टार तक की रेटिंग देती है। अब Euro NCAP ने 2026 से अपने सेफ्टी नियमों में बड़े बदलाव करने का ऐलान किया है। इसका सीधा असर कार कंपनियों पर पड़ेगा, क्योंकि अब बिना फिजिकल बटन वाली कारों को फुल सेफ्टी पॉइंट्स नहीं मिलेंगे।
क्यों हो रहे हैं बदलाव?
Euro NCAP का कहना है कि नई गाइडलाइंस का मकसद ड्राइवर का ध्यान सड़क से न हटे, यह सुनिश्चित करना है। हाल के अध्ययन बताते हैं कि ड्राइविंग के दौरान सिर्फ 2 सेकंड के लिए भी आंखें सड़क से हटना हादसे का कारण बन सकता है। टचस्क्रीन सिस्टम इस जोखिम को और बढ़ा देता है क्योंकि किसी फंक्शन को इस्तेमाल करने में 5 से 40 सेकंड तक का ध्यान भटक सकता है।
अब जरूरी होंगे फिजिकल बटन
2026 से Euro NCAP के नियमों के तहत, हॉर्न, इंडिकेटर, हेडलाइट, हैजर्ड लाइट, वाइपर और SOS बटन जैसी जरूरी चीजों के लिए फिजिकल कंट्रोल होना अनिवार्य होगा। यानी अब सिर्फ टचस्क्रीन पर आधारित कंट्रोल वाली कारें कम सेफ्टी पॉइंट्स पाएंगी। यह नियम कार के इंटरफेस में स्पष्ट दृश्यता और एक्सेसिबिलिटी पर भी जोर देता है।
कार कंपनियों की चिंता क्यों बढ़ी?
आजकल ज़्यादातर कार ब्रांड्स “क्लटर-फ्री” और “मॉडर्न” इंटीरियर डिजाइन अपनाते हैं, जिनमें फिजिकल बटन बहुत कम होते हैं। सबकुछ डिजिटल स्क्रीन पर शिफ्ट कर दिया गया है। अब इन नई गाइडलाइंस को अपनाने के लिए कार कंपनियों को हार्डवेयर डिजाइन बदलना, सप्लाई चेन अपडेट करना, और नई लागतें झेलनी पड़ेंगी। इससे नई कार लॉन्च में देरी भी हो सकती है।
और क्या बदलेगा Euro NCAP में?
नई सेफ्टी टेस्टिंग में अब ड्राइवर ड्रोसिनेस डिटेक्शन (Driver Drowsiness Detection) को 25 पॉइंट्स मिलेंगे, जबकि पहले सिर्फ 2 पॉइंट्स मिलते थे। यह सिस्टम अब ड्राइवर की आंखों और सिर की मूवमेंट को लगातार मॉनिटर करेगा और शराब या नशे के असर की पहचान भी करेगा।
इसके अलावा, रियर सीट बेल्ट अलर्ट, चाइल्ड सेफ्टी डिटेक्शन और एडवांस्ड एयरबैग सेंसर जैसी सुविधाओं को भी जरूरी किया गया है। एयरबैग अब यात्री के आकार और पोजिशन के हिसाब से अपने आप एडजस्ट होंगे।
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नतीजा
Euro NCAP का यह कदम कारों को और ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में है। हालांकि, इससे कार कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, लेकिन ड्राइवर और यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह एक जरूरी बदलाव माना जा रहा है। आने वाले समय में यूरोप की कारों में फिजिकल बटन और एडवांस्ड सेफ्टी टेक्नोलॉजी दोनों का मेल देखने को मिलेगा।
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